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श्री गुरुचरणमास

||हनुमान चलीसा पठण||

लाय सञ्जीवन लखन जियाये । श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचन्द्र के काज सँवारे

हनुमान चलिसा पठण : - श्रीअनिरुद्ध गुरूक्षेत्रम्